कोरोना वायरस की वजह से लोगों का जीवन तहस-नहस हो चुका है. हर दिन कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़ती ही जा रह ही हैं। भारत में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 2000 के पार हो गई है और 56 लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है। हालांकि राहत की बात यह है कि 171 कोरोना वायरस संक्रमित लोगों को ठीक भी किया जा चुका है। ऐसे में सरकार लगातार कोरोना वायरस से निपटने के लिए हर मुमकिन प्रयास कर रही है।

अगर भारत में लॉकडाउन जैसा सख्त कदम नहीं उठाया जाता तो भारत में कोरोना संकट इससे भी ज्यादा भयानक रूप ले सकता था। हालांकि अब भी भारत के हालात नाजुक ही है क्योंकि पिछले 6 दिनों से भारत में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है लगभग रोज के 150 से 200 नए मामले सामने आ रहे हैं।

काेराेना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए देश काे एक अाैर लाॅकडाउन की ज़रुरत है। क्योंकी काेराेना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए अभी तक कोई दवाई नही बनी है इसलिए काेराेना वायरस के संक्रमण से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है और वो है “सोशल डिस्टैंसिंग” ही कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने का एक मात्र तरीका है। “सोशल डिस्टैंसिंग” के जरिये संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए भारत में पीएम मोदी ने 24 मार्च की मध्यरात्रि से 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया हुआ है। और कहा गया है कि सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से कोरोना वायरस पर नियंत्रण करने की कोशिश की जा रही है।

आपको बता दें कि भारत में पहला कोरोना वायरस संक्रमित 30 जनवरी 2020 को मिला 1 संक्रमित व्यक्ति से 100 लोगों को संक्रमित होने में लगभग 19 दिन लगे, 100 से 1000 लोगों को संक्रमित होने में 13 दिन लगे और 1000 से 2000 लोगों को संक्रमित होने में मात्र 6 दिन लगे अगर देश में लॉकडाउन को कम से कम 21 दिनों के लिए नहीं बढ़ाया जाता और लॉकडाउन के नियमों का ठीक से पालन नहीं किया जाता तो 1 जून तक हमारे देश में भी अमेरिका और इटली की तरह कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या एक लाख से ज्यादा होगी।

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